Saturday, 8 March 2014
Friday, 7 March 2014
क्यों न मुझे बेपनाह प्यार हो ....
है किसी की अक्श
धुंधली सी मेरे खाबों में
जिसकी तलाश में
ये झुकी पलकें हैं
है उसकी आहट
कुछ इस कदर यादों में
कि तन्हाइयों में भी
अपनी सदा
कभी दे जाती है
नाम भी दे दूँ
गर किसी लम्हा
उसका दीदार हो
बाहें फैला दूँ
गर किसी वादों में
उसके आने का इक़रार हो
है कौन वो
क्या पता !
है कहाँ वो
क्या खबर !
फिर भी हर पल
अपने करीब पता हूँ उसे
तो क्यों न मुझे
बेपनाह उससे प्यार हो ....
धुंधली सी मेरे खाबों में
जिसकी तलाश में
ये झुकी पलकें हैं
है उसकी आहट
कुछ इस कदर यादों में
कि तन्हाइयों में भी
अपनी सदा
कभी दे जाती है
नाम भी दे दूँ
गर किसी लम्हा
उसका दीदार हो
बाहें फैला दूँ
गर किसी वादों में
उसके आने का इक़रार हो
है कौन वो
क्या पता !
है कहाँ वो
क्या खबर !
फिर भी हर पल
अपने करीब पता हूँ उसे
तो क्यों न मुझे
बेपनाह उससे प्यार हो ....
Saturday, 15 February 2014
For Love
World A Library Is ,
And Our Life That Library Of Books Amenities.
Love, faith, relationships, being, feeling, ability and all those things that we do in your life or someone
else From Taking Do These That Book The Pages Do.
So Ever A Pages The Squeeze Tax Or Twist Tax Not Place.
because People Of Eyesight That Pages On First Some Is Which Folded OccurredOr Complicate Occurred The The.
more Do To Each Pages The Strong And Beautiful Make Big , she Emerald Khudbakhud Logo That Eyesight In Descends Will.
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Tomorrow Riste The Pages The Strong And Beautiful Making Of Day Was. Whose Name You Years From Heart The Pages On Written Sitting Were , hope Is You Heart Of Thing Saying The Center.
If The Acceptance Not All Join Then Some Wrong Not Excuse Otherwise Riste The Emerald Tangled Will.
Just Expectation Keep Because The The Tomorrow Your The How good Will You Not Know.
- धीरज चौहान
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- धीरज चौहान
Tuesday, 11 February 2014
वादा 'Promise'
आओ मुझसे एक वादा करो
आओ मुझसे एक वादा करो
समाकर मेरी बाँहों में
सिमट कर यादो के सिलवटों में
यूँ ही हमेशा
जिंदगी की आखिरी मुकाम तक
मेरे साथ रहने का इरादा करो
आओ मुझसे एक वादा करो
पहले ही कई रिश्तों के साथ
नवाज़ चूका है मुझे खुदा ने
जो रिस्ता बना है तुमसे मेरा
इसमें जब भी कमजोर होने लगूं
तुम इसे सैयम से निभाने का हौसला करो
आओ मुझसे एक वादा करो
तुम मेरी हो और मेरी ही रहोगी
ये वचन देता हूँ तुम्हें
शब्द , स्वाभाव और समर्पन ये मूल मंत्र है जीने के
रहो खुश और खुश रखने का इशारा करो
आओ मुझसे एक वादा करो
सुख-दुःख के और भी करवट लेने हैं हमें
न जाने कितने रंग लगेंगे
हमारे आसियाने सजाने में
तुम बिना घबराये बिना सहमें
गीत हमारे प्यार की सुनाया करो
आओ मुझसे एक वादा करो
- धीरज चौहान
Monday, 10 February 2014
भावना (Poem)
भावना
एक सवाल
जो उलझी है
मन के भीतर
अंतरात्मा की पहलूओं में
जो बंधी है
शायद कभी न खुलने के लिए
दिल कि गहराइयों में
निःस्वार्थ प्रेम की
बंधनों से
न जेन कैसे आज पन्नो पे
एक शब्द रूप
दे डाला उसे
न जाने कैसे
जुबां की जगह
आज हांथों ने ले ली
सम्बोधित करके
मेरी 'भावना' को
एक सवाल से।
एक सवाल
जो उलझी है
मन के भीतर
अंतरात्मा की पहलूओं में
जो बंधी है
शायद कभी न खुलने के लिए
दिल कि गहराइयों में
निःस्वार्थ प्रेम की
बंधनों से
न जेन कैसे आज पन्नो पे
एक शब्द रूप
दे डाला उसे
न जाने कैसे
जुबां की जगह
आज हांथों ने ले ली
सम्बोधित करके
मेरी 'भावना' को
एक सवाल से।
मेरी कमी (Poem)
मेरी कमी
ये हवाएं आज भी
तेरे रू-ब-रु होकर
मज़ाक करती है कभी
तेरा पल्लू उड़ाकर
ठिक उसी तरह
जब वो झूला करते थे
कभी मेरे चेहरे पे
और तंग करते थे मुझे,
पर आज लम्हों ने
कुछ इस तरह बदला है,
कि वही तुम हो
कि वही हवाएं हैं
कि वही फ़िज़ायें हैं
वही घटायें हैं
बस कमी है तो
उन उड़ते पाल्लुओं के निचे
मेरे चेहरे कि.…
ये हवाएं आज भी
तेरे रू-ब-रु होकर
मज़ाक करती है कभी
तेरा पल्लू उड़ाकर
ठिक उसी तरह
जब वो झूला करते थे
कभी मेरे चेहरे पे
और तंग करते थे मुझे,
पर आज लम्हों ने
कुछ इस तरह बदला है,
कि वही तुम हो
कि वही हवाएं हैं
कि वही फ़िज़ायें हैं
वही घटायें हैं
बस कमी है तो
उन उड़ते पाल्लुओं के निचे
मेरे चेहरे कि.…
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